Saturday, March 7, 2009

महिला दिवस पर विशेष -


हर आँगन से उठती सिसकी
सदियों से खामोश है -
आँगन से आँगन तक के सफर में ।
गुजरती रहीं सदियाँ
तमाम उम्र के बेगार का अंत
सचमुच बहुत भयावह है ।
बचपन गुज़रा ,जवानी गुज़री
बुढापे तक अस्तित्व पर पर्दा ही पर्दा
देवी सी पूजी गई हो
या दासी सी तिरस्कृत रही हो ,
मनुष्य की पहचान से हमेशा महरूम रही ।
पत्थर -युग से कंप्यूटर तक का
सफर सफर तय कर चुका संसार
पर आधी दुनिया अभी तक
आँगन से आँगन तक के सफर में ही दफ़न है ।

Friday, March 6, 2009

बापू कि स्मृतियों के बहाने कुछ द्वंद

माडिसन एवेनुए में ५९५ नम्बर में अमेरिका के जेम्स ओटिस ने बापू के सामानों की नीलामी की...

भारत के विजय माल्या ने इसे भारत की प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए बापू की सभी उपलब्ध वस्तुओं को ११ करोड़ में खरीदा । इसके पहले भी वो टीपू सुलतान की तलवार भारत ला चुके है ।




बापू के सामानों के नीचे उस अख़बार की प्रति जिसमें गाँधी जी की हत्या की ख़बर प्रकाशित हुई थी.



बापू की ये जेब घड़ी ज़ेनिथ कंपनी की है और संभवत: 1910 में बनी थी.



गांधी के चश्मे की भी नीलामी हुई. महात्मा गांधी का अपने चश्मों के बारे में कहना था," इन चश्मों से मैं आज़ाद भारत की तस्वीर देखता हूँ."


ये दावा किया गया है कि हत्या से पहले बापू ने आख़िरी बार इसी प्लेट-कटोरी में खाना खाया था.

लेकिन प्रश्न यह है की बापू ने जिन दो आधारभूत सिद्धांतों की बात की थी उन पर कितना अमल हो रहा है । महात्मा गाँधी ने कहा था -
१) साधनों की सुचिता और
२)आचरण की पवित्रता
यही दो अमोध हथियार है जिन के बल पर रामराज्य की स्थापना हो सकती है । आज जब समाज में भ्रष्टाचार , हिंसा सहित नाना प्रकार की बुराईयाँ घर कर गई है ऐसे में हमें विचार करना होगा की क्या ? बापू से जुड़े सामानों की हमें आधिक चिंता है ,या उनके सिद्दांतो की ।
आज वैश्विक स्तर पर दो तरह की समस्याएं है -आतंकवाद और आर्थिक मंदी । दोनों का समाधान बापू के सिद्दांतो में है । आतंकवाद का कारण जिसके पास शक्ति है वो उसका दुरुपयोग कर रहा है । शक्तिशाली अमेरिका कमजोर देश जैसे इराक ,अफगानिस्तान को बरबाद कर रहा है । इसकी प्रतिक्रियात्मक हिंषा ही आतंकवाद है । वही दूसरी ओर आर्थिक मंदी का कारण आज की अर्थव्यवस्था का सट्टेबाजी आधारित होना है । भारत जैसे देश में जहाँ ६० प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर है वहां अर्थव्यवस्था कृषि आधारित होनी चाहिए , जिससे रोजगार के आधिक अवसर उत्पन्न हो । बापू ने कहा था कि मशीनीकरण तब तक उचित है जब तक उसे आदमी चलाये ,लेकिन जब यह आदमी को चलाने लगे तो समाज के लिए घातक हो जाएगा ।
आईये बापू के धरोहरों को लाने के साथ ही सत्य ,आहिंसा और सत्याग्रह को अंगीकार करने का एक सार्थक प्रयास कर समाज कि बेहतरी में अपना योगदान सुनिश्चित करें ।
(सभी फोटो बी.बी.सी.से साभार )

Wednesday, March 4, 2009

गुजरात के सिधी गोमा जनजाति

सूरजकुंड शिल्प मेला २००९ में गुजरात के सिधी गोमा जनजाति का अदभुत प्रदर्शन ।

















असीम सहिबाबादी की रचना ...एक रिक्सावाले की व्यथा


परिंदा हूँ ये फितरत है, मेरा उड़ना नही जाता ,
जमीं पर आ तो जाता हूँ मगर ठहरा नही जाता।
बियाबानो के पौधों की तरह है,ज़िन्दगी अपनी ,
हम अपने दम पे बढते हैं हमें पाला नही जाता ।
वही आटे की रोटी है ,वही आटे की चिड़िया है ,
खिलौना हमको रोने पर कभी लाया नही जाता ।
अटक जाते है , जब सूखे निवाले मेरे बच्चों के ,
मैं मुहं फेर लेता हूँ , उधर देखा नही जाता ।
अभी है पाँव कुछ छोटे नही आते है पैडल तक ,
वो रिक्शा खींचता तो है मगर खींचा नही जाता ।

Tuesday, March 3, 2009

उपचुनाव का झटका -मायावती हुयी "मुलायम"



उत्तर प्रदेश के भदोही विधानसभा उपचुनाव में बसपा की हार ने कई सवाल खड़ा किए है । पिछले दिनों समाजवादी पार्टी के रास्ट्रीय नेता और राज्य सभा सांसद के साथ मै दो दिन के चुनावी दौरे पर गया था। मैंने वहा सुरियावा ब्लाक के लगभग २५ गावों का दौरा किया । जिसमे कई बाते खुल कर सामने आई । इस उपचुनाव में दो लोगो की चर्चा सबसे आधिक थी - पड़ोस के सपा विधायक विजय मिश्रा जिनकी पत्नी भदोही की जिला पंचायत अद्यक्ष भी है । इनके बारे में कई तरह की चर्चाएँ थी , ये बाहुबली है और इनकी जिले में तूती बोलती है ऐसा लोगों का कहना था । विजय मिश्रा पर कई आपराधिक मुक़दमे लगे है । कुछ लोगो का कहना था कि बनारस के व्यापारी रुंगटा अपहरण में प्रयोग की गई गाड़ी इन्ही की थी । ९५ के लगभग भदोही में हुए शुक्ला वकील हत्याकांड में लिप्त राजपूत बाहुबली को जेल भिजवाने और उसपर कई मुक़दमे दायर करवाने के कारन विजय मिश्रा ब्रह्मण स्वाभिमान के प्रतीक बन गए । इस बार के उपचुनाव में सपा प्रत्याशी मधुबाला पासी को टिकट दिलवाने में विजय मिश्रा का ही योगदान था ।

वही दूसरी ओर बसपा का मोर्चा पड़ोस के विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री रंगनाथ मिश्रा ने संभाला था । रंगनाथ मिश्रा पहले बीजेपी के कद्दावर नेता थे लेकिन बीजेपी के पतन के कारण उन्होंने बसपा को नया घर बनाया। रंगनाथ मिश्रा के बारे में लोगो ने बताया की पहले बहुत सहयोगात्मक थे , लोगो के सुख दुःख में सामिल होते थे , कार्यकर्ताओं सहित जनता के लिए उत्तरदायी थे । लेकिन मायावती सरकार में हर महीने रूपया देने के कारण वसूली में सलिप्त होगये है । जिससे क्षेत्र में नकारात्मक प्रभाव पड़ा है । कोटेदारों , ठेकेदारों , प्रधान आदि लोगों पर उपचुनाव में बसपा को जिताने के लिए दबाव बनाने के कारण रही सही प्रतिष्ठा भी खो दी । मंत्री बनने के बाद पहली बार भदोही के दौरे पर रंगनाथ मिश्रा ने १६ घंटे बिजली देने की बात कही थी , इसमे वो पूरी तरह विफल रहे । जनता में रोष का एक कारण ये भी था । यहाँ के लोगो ने बताया की मिर्जापुर से पत्थरों को काट कर लखनऊ में पार्क और मूर्तियाँ बनवाई जा रही है , जबकि कालीन उद्योग के पतन से बेहाल लोगो की सरकार कोई खोज ख़बर नही ले रही है । बसपा के स्थानीय सांसद भी क्षेत्र को लेकर बेहद उदासीन रवैया अपना रहे है ।

नसीमुदीन सिद्दीकी चुनाव के १० दिन पहले ही बनारस सिर्किट हाउस में डेरा जमाये थे । मुस्लिम बाहुल्य भदोही में लगातार दौरा कर रहे थे लेकिन बीएसपी को अपेक्षित परिणाम दिलाने में विफल रहे । मायावती के भदोही चुनावी जनसभा में मंच सहित सभी जगहों पर बसपा के घोषित प्रत्याशी सूर्य मणि ही छायें रहे । लोगो का कहना था की यह विधान सभा के प्रत्याशी का चुनाव है या लोकसभा के । सूर्यमणि क्षेत्र के ही नही वरन अन्तर रास्ट्रीय स्तर के कालीन व्यापारी है । अरबपति व्यापारी को टिकट मिलने से बसपा के ही नही वरन आम लोग भी नाराज है । उनका कहना है की क्या बसपा में नेताओं का आकाल पड़ गया है ? अथवा जिसके पास रूपया नही है वो बसपा का टिकेट नही पा सकता? जिले से सटे दो अन्य ब्रह्मण नेताओ काबीना मंत्री राकेशधर त्रिपाठी और नकुल दुबे को मायावती के बार बार अपमानित करने की उड़ती ख़बर से ब्रह्मण मतदाता नाराज़ था । जिले के कुछ प्रमुख ब्रह्मण नेता जो इस समय बसपा में है , उनका कहना था की दरी पर दलितों के साथ बैठना और मायावती का पैर छूना ब्राह्मणों का अपमान है , सतीश चंद्र मिश्रा के बारे में पूछने पर जाति विशेष के लोगो का आक्रोश खुल कर सामने आ गया, लोगो ने बताया कि उनके परिवार और रिश्तेदार के २५ लोग लाल बत्ती का लुफ्त उठा रहे है ।

चुनाव प्रचार के दौरान सपा के प्रदेश अध्यक्ष और मुलायम सिंह के छोटे भाई शिवपाल यादव और विजय मिश्रा कि तलाशी लेना और सभा न करने से जनता कि सहानभूति भी सपा के पाले में गई । कुल मिलकर आपसी समस्यायों से जूझ रही सपा के लिए यह उपचुनाव वरदान साबित हुआ । मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में जीत मुस्लिम मतों का विश्वास सपा में होने कि पुष्टि करता है । सपा की विजय में पार्टी की रणनीति का बड़ा योगदान रहा । मुस्लिम जिला अद्यक्ष , ब्रह्मण रणनीतिकार विजय मिश्रा सहित पार्टी के सभी रास्ट्रीय नेताओ के दौरे से सपा ने विजय श्री हासिल की । बसपा के लिए यह चुनाव खतरे की घंटी का काम कर गया । बलिया के संसदीय उपचुनाव में हार के बाद यह बसपा की दूसरी हार है । दलितों की उपेक्षा , पार्को और प्रतिमाओं पर थोक के भावः धन खर्चा करने की प्रवित्ति , बाहुबलियों को टिकट वितरण कर पार्टी कार्यकर्ताओं को नज़र अंदाज़ करने जैसे कई कारन मायावती और उनके रणनीति कारों को मंथन करने के लिए विवश करते है ।

Saturday, January 24, 2009

लचर पटकथा से चांदनी चौक टू चाइना


पिछले कुछ वर्षोँ से लगातार अच्छी फिल्मों में अभिनय कर रहे अक्षय कुमार ने एक कमजोर प्रस्तुति दी है। हम बात कर रहें हैं, ‘चादंनी चौक टू चाइना‘ की।फिल्म के निर्देशक निखिल आडवानी और मुख्य कलाकार अक्षय कुमार, दीपिका पादुकोण,मिथुन चक्रवर्ती हैं। फिल्म की कहानी सिद्धू नामक एक युवक के चांदनी चौक से चाइना पहुंचने की घटना पर आधारित है।संवाद और पटकथा 90 के शुरूआती दशक के फिल्मों की याद दिलाते हैं। प्रारम्भ के ही 30 मिनट में पूरी कहानी समझ में आ जाती है। एक्शन और हास्य दोनों विधाओं मे अक्षय कुमार सामान्य ही दिखे। दीपिका पादुकोण के कुछ स्टंट सीन उनकी अभी तक बन गयी इमेज को तोड़ते दिखाई दिये। फिल्म में कई जगह अश्लील शब्दों का प्रयोग फूहड़ता को दर्शाता है। दीपिका ने फिल्म में डबल रोल का ठीक-ठाक प्रदर्शन किया है। मिथुन के वही पुराने घिसे-पिटे संवाद फिल्म को उबाऊ बनाते है । चापिस्टिक चरित्र फिल्म में कई जगह मनोरंजन करने का प्रयास करता है। चीन की दीवार की हल्की झलक, बेहतरीन काॅस्ट्यूम डिजाइन कुछ देखने लायक चीजें हैं। फिल्म के संगीत और गीत काफी प्रभावी रहे। कैलाश खेर का सूफियाना अंदाज फिल्म में नये तरह की ताजगी भरता है। ’’ नाम है सिद्धूः यस एच आई डीएचयू ’’ गीत बेहद मनोरंजक और कर्णप्रिय लगा। अंत में निर्देशक ने संभावित ’’ चांदनी चौक टू अफ्रीका ’’ बनाने की बात प्रतीक में कही है। ऐसे में दर्शकों की उम्मीदों पर खरा न उतरने के बाद चांदनी चौक टू चाइना की सीक्वेल क्या गुल खिलाएगी ? यह देखना बाकी है।

Wednesday, January 21, 2009

भाजपा का संकट -मुलायम का कल्याण

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का भाजपा से इस्तीफा देना पार्टी के लिए नया संकट है। पिछले कई महीनों से वह असंतुष्ट चल रहे थे । उनका कहना था कि टिकट बटवारे से लेकर कई मुद्दों पर उनकी उपेछा कि जा रही थी । उत्तर प्रदेश में पिछले दस वर्षो से भाजपा में किसी भी पिछडे या दलित नेता का उभार नही हो पा रहा। जोकि भाजपा के लिए आगामी लोक सभा चुनाव के लिए सुभ संकेत नही है ।ओम प्रकाश सिंह ,संतोष गंगवार जैसे कद्दावर नेता उपेछित ही रहे है । कभी अनुसाशन का डंका पीटने वाली पार्टी में लगातार पलायन जारी है । मदन लाल खुराना , बाबु लाल मरांडी , उमा भारती, गोविन्दाचार्य जैसे लोगो के पार्टी से जाने के बाद यह कुछ ख़ास लोगो कि पार्टी बनती जा रही है । रास्ट्रीय स्टार पर उभरे नेताओं का जनाधार बेहद सिकुड़ा हुआ है ।

राजस्थान के भाजपा सांसद द्वारा टिकट वितरण में खरीद फरोख्त, संसद का नोट कांड , ऑपरेशन चक्रवुह जैसी घटनाएँ भाजपा के सुचिता पर सवाल खड़ा करती है । पूर्व राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत के हालिया चुनाव लड़ने कि बात भी भाजपा के लिए नया संकट है । कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में भाजपा कि स्थिति सुधरने पर ही पी यम् इन वेटिंग अडवाणी के सपने हकीकत में बदल सकते है । परतु पार्टी कीआतंरिक उलयम , मुलायम-कल्याण-कांग्रेस गठबंधन और मायावती कि सोशल इंजीनियरिंग उत्तर प्रदेश में क्या गुल खिलाएगी ये तो वक्त ही बताएगा ।